शनिवार 24 2020

कोविड-19 से पहले जिंदगी


" कोरोनावायरस यह ऐसा शब्द है जिसने मानव इतिहास और मानव जिंदगी को बदल कर रख दिया है। मानव सोच और मानव प्रवृत्ति पर अपना प्रभुत्व जमा रखा है जिस को तोड़ने के लिए मानव विज्ञान के हर वैज्ञानिक और अनुसंधान केंद्र अपनी तरफ से लगातार हर संभव कोशिश कर रहा है। "

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पिछले 6 से 7 महीनों में मानव जिंदगी का ऐसा कोई पहलू नहीं है जहां कोरोनावायरस का प्रभाव ना हो कोरोनावायरस से लड़ते-लड़ते हम भूल चुके हैं कि कोरोनावायरस से पहले हमारी जिंदगी कैसी हुआ करती थी। आज उन बीते हुए दिनों को 10 लाइनों के माध्यम से याद करेंगे उम्मीद है यह 10 लाइनें हर आदमी की लाइनें होंगी।

1. खाने-पीने की आदतें Eating Habits


कोरोनावायरस में हमारे खाने-पीने की आदतों में ऐसी दखलंदाजी की है कि कुछ भी खाने से पहले कई बार सोचना पड़ता है कि क्या खाएं और क्या ना खाएं। ऐसा लगता है किसी ने हमारे खाने पीने पर पाबंदी लगा दिया हो लेकिन पहले सब चीजों से आजादी थी।

2. मास्क और सैनिटाइजर मुक्त जिंदगी Mask and Sanitizer free life

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बाहर निकलना हो या किसी के सामने खड़ा होना हो पब्लिक प्लेस में जाना हो या स्कूल-कॉलेज जाना हो हॉस्पिटल जाना हो या ऑफिस जाना हो, जब भी घर से बाहर निकलना हो मास्क और सैनिटाइजर आवश्यक हो गया है, इसके बिना ऐसा लगता है जैसे हम किसी मौत के गली से गुजरने वाले हो। अगर हम मास्क और सैनिटाइजर का इस्तेमाल ना करें तो न जाने कब और कहां कोरोनावायरस के संपर्क में आ जाए। कभी-कभी तो मास्क लगाने पर सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसा लगता है खुली हवा में सांस लेना अपराध सा हो गया है। क्या दिन है जब हम खुली हवा में साथ दिया करते थे।

3. सगे संबंधियों के संपर्क में रहने की स्वतंत्रता Freedom of visit at near dear house

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हम कितने आजाद थे इसका एहसास अब होता है। क्या दिन थे जब हम अपने दोस्तों यारों रिश्तेदारों वह प्रिय जनों के साथ-साथ साथ उठा बैठा करते थे, साथ-साथ खाते-पीते थे, क्या दिन थे जब एक दूसरे को प्यार से देखा करते थे, गले लगते थे, बाहों में बाहें डाल कर घुमा करते थे, घर में आते ही बच्चों को गोद में उठा लिया करते थे, लेकिन कोरोनावायरस ने हमें इन चीजों से अनजान का बना रखा है। ऐसा लगता है कि हम एक दूसरे के लिए अछूत बन गए हैं।

4. दूरदराज की यात्राएं Traveling at remote places

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उस वक्त का आलम यह था कि कोई कश्मीर की यात्रा करता, कोई कन्याकुमारी की यात्रा, कोई हज करता, तो कोई हनीमून की टिकट बुक करता था। बच्चे स्कूल ट्रिप पर जाया करते तो, वहीं कुछ लोग पिकनिक का प्लान करते थे। जरा सा भी काम से फुर्सत मिलता तो लोग घर से दूर अपने सगे संबंधियों के पास जाया करते। लेकिन कोरोनावायरस ने यहां भी अपना पांव पसार लिया है।अब तो बिना वजह कहीं जाना मतलब जान को खतरे में डालना है।

5. त्यौहार मनाना Festival Celebration

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किसी भी त्यौहार या पर्व का नाम जुबा पर आते ही दिमाग में खुशनुमा माहौल बन जाता है। उन वक्त पर जब कोरोनावायरस का किसी ने नाम तक नहीं सुना था तो त्यौहार कितनी धूमधाम से मनाया जाता था। चाहे वह दिवाली हो ईद हो, होली हो या क्रिसमस का दिन हो। सभी त्यौहार के आने पर खुशियां जाहिर करते थे और अपनों के साथ मिलकर त्यौहार का आनंद उठाते थे। भीड़ में जाने से जरा भी परहेज नहीं करते थे। मेला तो भीड़ का दूसरा नाम है जहां अनजाने लोग एक दूसरे के संपर्क में आते थे परंतु कोरोनावायरस ने यहां भी दूरियां कायम कर दी।

6. मूवी और सिनेमाघर Movie and Theatre 

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मूवी और सिनेमा घर आज के समय में मनोरंजन का सबसे अच्छा और बेहतरीन साधन समझा जाता है। जहां परिवार के सदस्य मिलकर एक साथ मूवी देखते हैं, वही दोस्त लोग अपने दोस्तों के साथ मूवी का आनंद उठाते हैं। कपल्स एक दूसरे के साथ टाइम शेयर करने का सबसे अच्छा माध्यम सिनेमा घर को समझते हैं, लेकिन कोरोनावायरस ने यहां अपनी ऐसी पहचान छोड़ी कि मूवी और सिनेमा घर से नफरत सी होने लगी है। लोग घर में ही अपने टीवी और मोबाइल पर ना चाहते हुए भी बिजी रहने लगे है।

7. मॉल में शॉपिंग Frequently Shopping at Mall

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मॉल में शॉपिंग करने का तो अपना अलग ही अंदाज है। घर की औरतें बच्चे कितने खुश होते हैं। शॉपिंग करते वक्त ऐसा लगता है जैसे घर में खुशियां खरीद कर ला रहे हो और खूब इंजॉय कर रहे हो। परंतु उन खुशियों पर कोरोनावायरस राक्षक की नजर लग गई, और अब हम घर में पुरानी चीजों के साथ ही गुजारा कर रहे हैं।

8. खर्च करने की आजादी Liberty of Budget

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जब कोरोनावायरस नहीं था तब तक खर्च करने की आजादी बहुत थी। क्योंकि खर्च करने के लिए कमाई भी हुआ करती थी। कोरोनावायरस ने सोशल डिस्टेंसिंग मेंटेन करने की ऐसी आदत डाली कि कल कारखाने, स्कूल कॉलेज, सामुदायिक संस्थान एवं अर्थव्यवस्था को चलाने वाले सारे माध्यम धीरे-धीरे करके बंद हो गए। जिसके कारण अर्थव्यवस्था पूरी तरह से धीमी हो गई। और प्रति व्यक्ति आय भी कम हो गई। इस तरह से आम आदमी के खर्च करने की आजादी ही छीन गई।

9. नौकरी एवं व्यवसाय जाने का डर नहीं No tension of Job/ Business

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उस वक्त नौकरी और व्यवसाय पर खतरा मंडराने का डर तो था परंतु आज जो हालात हैं उस वक्त कम था। क्योंकि नौकरी के ऑप्शन थे एक नौकरी गई तो दूसरी नौकरी की तलाश जल्द ही खत्म हो जाती थी। परंतु अब तो वेतन मिलना तो दूर नौकरी बचाना मुश्किल हो गया है। न जाने कितने बेरोजगार हुए और न जाने ही कितने व्यवसाय डूब गए। जितने व्यवसाय डूबे उतनी नौकरी गई। आज लोग नौकरी के लिए दर-दर भटक रहे हैं किसी भी सर्च पर लोग नौकरी करने को तैयार है। वह भी मिलना मुश्किल हो गया है।

10. समय निर्धारण Most of Schedule was on time



सबसे मुख्य और महत्वपूर्ण बात यह थी कि हर काम के लिए एक निश्चित समय हुआ करता था। जिसका जो टाइम था उस टाइम पर कार्य को पूरा कर दिया जाता है परंतु कोरोनावायरस ने सारा टाइम-टेबल फेल कर दिया अब कुछ भी पूर्व निर्धारित नहीं रहा। क्योंकि समय सूची का वक्त बदल गया है।

आधार कार्ड केंद्र In this Corona lockdown Aadhar enrollment centers are opened or not, When will Aadhar centers start working from lockdown?

अभी तक बहुत से संस्थान भी नहीं खुले हैं आधार केंद्र जैसी सुविधाएं भी बाधित है। आधार कार्ड केंद्र सुविधा पाने के लिए अभी लंबा इंतजार करना पड़ सकता है आप चाहे तो ऑनलाइन सुविधा प्राप्त कर सकते हैं जो 24 घंटा उपलब्ध है।

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