मध्यरात्रि का वह क्षण, जब भारत ने आज़ादी की साँस ली...
हर वर्ष 15 अगस्त को हम भारतीय स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं। यह केवल एक राष्ट्रीय पर्व नहीं, बल्कि वह दिन है जब सदियों की गुलामी के बाद भारत ने अपनी खोई हुई गरिमा पाई। लेकिन क्या हम वास्तव में इस दिन से जुड़े सभी पहलुओं को जानते हैं? आइए, इतिहास के पन्नों में छुपे कुछ कम चर्चित तथ्यों और अनसुनी कहानियों पर नज़र डालते हैं।
5 अगस्त की तारीख किसने चुनी और क्यों?
अक्सर लोग मानते हैं कि भारत ने खुद 15 अगस्त की तारीख चुनी थी। सच यह है कि यह तारीख ब्रिटिश वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन ने चुनी, क्योंकि 15 अगस्त 1945 को जापान ने मित्र राष्ट्रों के सामने आत्मसमर्पण किया था — यह दिन उनके लिए "शुभ" माना जाता था।
- भारत के नेताओं की प्राथमिकता जल्दी सत्ता हस्तांतरण थी, तारीख नहीं।
- अगर यह प्रक्रिया 1948 तक खिंचती, तो विभाजन और भी भयानक हो सकता था।
स्वतंत्रता से पहले का झंडा और पहली बार उसका फहराना
- 15 अगस्त 1947 को पंडित नेहरू ने लाल किले पर तिरंगा फहराया,
- लेकिन क्या आप जानते हैं? 7 अगस्त 1906 को कोलकाता के पारसी बागान स्क्वायर में "स्वतंत्र भारत का पहला झंडा" फहराया गया था। यह वर्तमान तिरंगे से अलग था — इसमें हरे, पीले और लाल रंग की धारियां थीं।
26 जनवरी और 15 अगस्त का गहरा रिश्ता
- 1929 के लाहौर अधिवेशन में पूर्ण स्वराज्य (Complete Independence) का प्रस्ताव पारित हुआ।
- 26 जनवरी 1930 को इसे प्रतीकात्मक स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया गया।
- इसी कारण भारतीय संविधान लागू करने के लिए 26 जनवरी 1950 की तारीख चुनी गई, ताकि उस ऐतिहासिक संघर्ष को सम्मान दिया जा सके।
कम चर्चित लेकिन महत्वपूर्ण तथ्य
- भारत को किसी लिखित ‘स्वतंत्रता प्रमाणपत्र’ पर हस्ताक्षर नहीं मिला– सत्ता हस्तांतरण केवल घोषणाओं और शपथ के माध्यम से हुआ।
- 15 अगस्त की सुबह दंगों की आग में जले कई इलाके– विभाजन की त्रासदी ने स्वतंत्रता का जश्न कई जगह शोक में बदल दिया।
- महात्मा गांधी दिल्ली में नहीं थे – वे बंगाल के नोआखाली में दंगे रोकने के लिए उपवास पर थे।
- पहली डाक टिकट 21 नवंबर 1947 को जारी हुई– जिस पर राष्ट्रीय ध्वज अंकित था।
- राष्ट्रगान 'जन गण मन' तत्काल नहीं अपनाया गया– 15 अगस्त को मुख्यतः "वंदे मातरम्" और "सारे जहाँ से अच्छा" गाए गए। जन गण मन को 1950 में आधिकारिक राष्ट्रगान बनाया गया।
- लाल किले से भाषण संवैधानिक बाध्यता नहीं है – यह पंडित नेहरू द्वारा शुरू की गई परंपरा है, जिसे हर प्रधानमंत्री निभाता आया है।
भारत का विभाजन — स्वतंत्रता की कीमत
- ब्रिटिश सरकार ने पहले कहा था कि वे 30 जून 1948 तक भारत छोड़ देंगे।
- लेकिन बढ़ते सांप्रदायिक तनाव के कारण माउंटबेटन ने इसे एक साल पहले ही कर दिया।
- 14-15 अगस्त 1947 की मध्यरात्रि को भारत और पाकिस्तान दो स्वतंत्र राष्ट्र बने — आज़ादी के साथ-साथ बँटवारे का गहरा ज़ख्म भी मिला।
आज के दौर में स्वतंत्रता दिवस का अर्थ
स्वतंत्रता दिवस केवल राष्ट्रीय ध्वज फहराने का दिन नहीं —
यह हमें याद दिलाता है कि आज़ादी केवल अधिकार नहीं, जिम्मेदारी भी है।
- यह दिन हमें आत्मनिर्भर भारत, स्वच्छ भारत और सशक्त भारत जैसे लक्ष्यों की ओर प्रेरित करता है।
- यह वह अवसर है जब हम सोचें कि जिन आदर्शों के लिए हमारे पूर्वजों ने बलिदान दिया, क्या हम उन्हें निभा पा रहे हैं?
15 अगस्त की सुबह केवल सूरज नहीं उगा था,
बल्कि एक नए युग की शुरुआत हुई थी।
आज़ादी हमें विरासत में मिली है,
लेकिन इसे जीवित रखना — यही हमारा सबसे बड़ा कर्तव्य है।