क्या आप जानते हैं कि इलाहाबाद कभी उत्तर प्रदेश की राजधानी हुआ करता था? फिर 1956 में राजधानी लखनऊ क्यों और कैसे बनी?
भारत के सबसे बड़े राज्यों में से एक उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि लखनऊ को राजधानी क्यों चुना गया और यह निर्णय कब लिया गया? इसके पीछे एक दिलचस्प ऐतिहासिक कहानी छिपी हुई है, जो हमें ब्रिटिश शासनकाल और स्वतंत्रता के बाद के दौर की राजनीतिक परिस्थितियों से जोड़ती है।
लखनऊ का ऐतिहासिक महत्व
लखनऊ का इतिहास बहुत पुराना है। इसे कभी अवध (Oudh) का केंद्र माना जाता था। अवध के नवाबों का मुख्यालय लखनऊ ही था, जिसकी वजह से यह शहर सांस्कृतिक, राजनीतिक और प्रशासनिक रूप से काफी महत्वपूर्ण बन गया था। यहां की नवाबी तहज़ीब, शायरी, कला और वास्तुकला ने इसे खास पहचान दी।
ब्रिटिश शासनकाल के दौरान भी लखनऊ की अहमियत बनी रही। 1857 की क्रांति में यह शहर स्वतंत्रता संग्राम का एक बड़ा केंद्र बना।
राजधानी बदलने का कारण
प्रारंभिक राजधानी
इलाहाबाद (प्रयागराज): स्वतंत्रता से पहले और कुछ समय बाद तक इलाहाबाद (प्रयागराज) संयुक्त प्रांत (United Provinces) की राजधानी थी। यह शहर प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता था और गंगा-यमुना के संगम पर स्थित होने के कारण इसकी भौगोलिक स्थिति भी प्रमुख थी।
भौगोलिक स्थिति और बढ़ती आबादी:
जैसे-जैसे राज्य का विस्तार हुआ और आबादी बढ़ी, इलाहाबाद से शासन चलाना कठिन होने लगा। राज्य के अन्य क्षेत्रों तक प्रशासनिक पहुंच आसान नहीं थी। इसलिए एक ऐसी जगह की जरूरत महसूस हुई जो राज्य के मध्य में हो और जहां से पूरे प्रदेश पर प्रभावी तरीके से शासन चलाया जा सके।
लखनऊ का चयन:
1956 में राज्य पुनर्गठन के दौरान लखनऊ को उत्तर प्रदेश की राजधानी घोषित किया गया। लखनऊ की केंद्रीय स्थिति, विकसित बुनियादी ढांचा, ऐतिहासिक महत्व और सांस्कृतिक पहचान ने इसे राजधानी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
1956 में राजधानी का परिवर्तन
राज्य पुनर्गठन अधिनियम 1956 के तहत उत्तर प्रदेश की सीमाओं में बदलाव किए गए। इसी समय प्रशासनिक सुविधा और राजनीतिक कारणों से लखनऊ को इलाहाबाद की जगह नई राजधानी बनाया गया।
लखनऊ को राजधानी बनाने के पीछे कारण:
- भौगोलिक केंद्र: लखनऊ उत्तर प्रदेश के मध्य में स्थित है, जिससे शासन और प्रशासन चलाना आसान हो गया।
- विकसित बुनियादी ढांचा: पहले से मौजूद सरकारी इमारतें और नवाबी दौर का शहर होने की वजह से प्रशासनिक ढांचा विकसित था।
- संस्कृति और राजनीति का संगम: लखनऊ को हमेशा से राजनीति, शिक्षा और संस्कृति का गढ़ माना जाता रहा है।
- रेलवे और सड़क संपर्क: लखनऊ की परिवहन व्यवस्था बेहतर थी, जिससे पूरे राज्य से जुड़ना सरल था।
इलाहाबाद को उच्च न्यायालय क्यों मिला?
हालांकि राजधानी लखनऊ स्थानांतरित हो गई, लेकिन इलाहाबाद उच्च न्यायालय (High Court) वहीं रखा गया। इसका कारण यह था कि इलाहाबाद पहले से ही न्यायिक दृष्टि से विकसित था और वहां का कानूनी ढांचा मजबूत था।
लखनऊ को राजधानी बनाने का निर्णय केवल राजनीतिक नहीं था, बल्कि यह भौगोलिक, प्रशासनिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण था। आज लखनऊ न केवल उत्तर प्रदेश की राजधानी है बल्कि इसे नवाबों का शहर और तहज़ीब की राजधानी भी कहा जाता है।
क्या आप जानते हैं?
- लखनऊ को आधिकारिक रूप से 1 नवंबर 1956 को राजधानी घोषित किया गया था।
- लखनऊ में विधानसभा भवन (Vidhan Bhavan) का निर्माण 1922 में ब्रिटिश काल में ही हो चुका था।