ई-रूपी क्या है ? यह कैसे काम करता है ? इससे किसको फायदा होगा ? और इससे नुकसान किसको होगा ? जानिए आसान भाषा में
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डॉक्टर जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे मरीजों का न सिर्फ इलाज करते हैं बल्कि उन्हें एक नया जीवन भी देते हैं । इसलिए उन्हें धरती पर भगवान का रूप कहा जाता है डॉक्टरों के समर्पण और इमानदारी के प्रति सम्मान जाहिर करने के लिए हर साल 1 जुलाई को नेशनल डॉक्टर्स डे मनाया जाता है । आखिर क्यों हर साल 1 जुलाई को भारत में इसे मनाया जाता है ? क्या है इसके पीछे की वजह ?
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| Happy Doctor's Day |
देश के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ बिधान चंद्र राय को श्रद्धांजलि और सम्मान देने के लिए उनकी जयंती और पुण्यतथि पर इसे मनाया जाता है । उनका जन्म 1 जुलाई 1882 में बिहार के पटना जिले में हुआ था । कोलकाता में मेडिकल की शिक्षा पूरी करने के बाद डॉ बिधान चंद्र राय MRCP और FRCS की उपाधि लंदन से प्राप्त की। उन्होंने साल 1911 भारत में जीवन की शुरुआत की ।
डॉ बिधान चंद्र राय का चिकित्सा के क्षेत्र में बहुत महत्वपूर्ण योगदान रहा है । उन्होंने लंदन के सेंट बार्टोलोमियू हॉस्पिटल से डॉक्टरी की पढ़ाई की कोशिश की । लेकिन उस समय उनके भारतीय होने की वजह से उन्हें दाखिला नहीं दिया गया । विधान चंद्र राय ने हार नहीं मानी और तकरीबन डेढ़ महीने तक हॉस्पिटल के डिन के पास आवेदन भेजते रहे ।
आखिर में हॉस्पिटल के डिन ने हार मान कर डॉ बिधान चंद्र राय के 30वी बार एप्लीकेशन देने के बाद उनको दाखिला दे दिया । पढ़ाई के बाद भारत लौटकर डॉ बिधान चंद्र राय ने चिकित्सा के क्षेत्र में विस्तृत काम किया ।
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| Roy in 1943 Courtesy:wikipedia.org |
डॉ बिधान चंद्र राय का जन्म 1 जुलाई 1882 को हुआ था और सौभाग्य से उनकी मृत्यु भी 1 जुलाई को ही हुई थी लेकिन इस बार साल 1962 था । वही महान फिजीशियन डॉ बिधान चंद्र राय पश्चिमी बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री भी रहे । उन्हें दूरदर्शी नेतृत्व के लिए पश्चिम बंगाल राज्य का आर्किटेक्ट भी कहा जाता है । 4 फरवरी 1961 में उन्हें भारत की सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया था ।
भारत में इसकी शुरुआत 1991 में तत्कालीन सरकार द्वारा की गई थी । तब से लेकर आज तक 1 जुलाई को नेशनल डॉक्टर्स डे मनाया जाता है । भारत के महान चिकित्सक और पश्चिम बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री को सम्मान और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए यह दिवस मनाया जाता है ।
पिछले साल 2020 का थीम था "Lessen the mortality of COVID-19" लेकिन इस बार नेशनल डॉक्टर डे का थीम Building the future with family doctors" है ।
राष्ट्रीय पंचायत राज दिवस हर साल 24 अप्रैल को पूरे देश भर में मनाया जाता है । यह क्यों मनाया जाता है ? और यह 24 अप्रैल को ही क्यों मनाते हैं ? इन सबका उत्तर आज आपको देने जा रहे हैं ।
सिर्फ केंद्र या राज्य सरकार ही पूरे देश को चलाने में सक्षम नहीं हो सकती । इसके लिए स्थानीय स्तर पर भी प्रशासन की व्यवस्था की गई है । इसी व्यवस्था को पंचायती राज नाम दिया गया है ।
पंचायती राज में गांव के स्तर पर ग्राम सभा, ब्लॉक स्तर पर मंडल परिषद और जिला स्तर पर जिला परिषद होता है । इन संस्थानों के लिए सदस्यों का चुनाव होता है । जो जमीनी स्तर पर शासन की बागडोर संभालते हैं ।
महात्मा गांधी कहते थे अगर देश के गांव को खतरा पैदा हुआ तो भारत को खतरा पैदा हो जाएगा । उन्होंने मजबूत और सशक्त गांव का सपना देखा था । जो भारत के रीढ़ की हड्डी होती है । उन्होंने ग्राम सभा का कांसेप्ट दिया था । उन्होंने कहा था कि पंचायतों के पास सभी अधिकार होने चाहिए ।
गांधी जी के सपनों को पूरा करने के लिए 1992 में संविधान में 73 वा संशोधन किया गया । पंचायती राज संस्थान का कांंसेप्ट पेश किया गया इस कानून की मदद से स्थानीय निकायों को ज्यादा सेे ज्यादा शक्तियां प्रदान की गई । उनको आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय की शक्ति और जिम्मेदारियांं दी गई ।
24 अप्रैल 1993 को संविधान में 73 वा संशोधन मुख्य रूप से घोषित कर दिया गया था तब से आज तक इस दिन को राष्ट्रीय पंचायती दिवस के रूप में मनाया जाता है। देश की करीब 70 फ़ीसदी जनसंख्या गांव में रहती है । और पूरे देश में दो लाख 39 हजार ग्राम पंचायत हैं ।
पंचायत व्यवस्था लागू होने के बाद पंचायतों को लाखों रुपए का फंड सरकार की तरफ से सालाना दिया जाता है । ग्राम पंचायतों में विकास कार्य की जिम्मेदारी प्रधान और पंचों की होती है । इसके लिए हर 5 साल में ग्राम प्रधान का चुनाव होता है ।
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| Indian Agriculture |
ग्राम सभा की बैठक बुलाने का अधिकार ग्राम प्रधान को होता है बैठक के लिए कुल सदस्यों की संख्या के पांचवें भाग की उपस्थिति जरूरी होता है । ग्राम पंचायत के एक तिहाई सदस्य किसी भी समय हस्ताक्षर करके लिखित रूप से यह बैठक बुलाने की मांग कर सकते हैं ।
15 दिन के अंदर ग्राम प्रधान को बैठक आयोजित करनी होती है । ग्राम पंचायत सदस्यों के द्वारा अपने में से किसी एक को उपप्रधान के रूप में निर्वाचित कर सकता है । यदि उपप्रधान का निर्वाचन नहीं किया जा सका हो तो नियत अधिकारी किसी सदस्य को उपप्रधान निर्वाचित कर सकता है ।
शुरुआती दिनों में गांव का सरपंच ही सम्मानित व्यक्ति होता था सबसे ज्यादा सरपंच की बात सुनी जाती थी । सभी उसके पास अपनी समस्याओं के निवारण के लिए आते थे । सरपंच के पास ही सारी शक्तियां होती थी लेकिन अब ग्राम ब्लॉक और जिला स्तर पर चुनाव होता है । और प्रतिनिधियों को चुना जाता है ।
सूचित जाति, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजातीय महिलाओं के लिए भी पंचायत में आरक्षण का प्रावधान होता है । पंचायती राज संस्थानों को कई तरह की शक्तियां भी प्रदान की गई है ताकि वे सक्षम तरीके से काम कर सके ।
पंचायती राज के बहुत सारे मुख्य कार्य होते हैं ग्राम के विकास से लेकर ग्राम में रहने वाले लोगों की सुख-सुविधाओं इत्यादि की सारी जिम्मेदारी ग्राम प्रधान की होती है अथवा पंचायती राज का होता है। पंचायती राज के कुछ मुख्य कार्य निम्नलिखित है
भारत के संविधान निर्माता, समाज सुधारक, दलितों के लिए आजीवन लड़ने वाले डॉक्टर भीमराव अंबेडकर का जन्म दिवस 14 अप्रैल को मनाया जाता है । हर बार की तरह इस बार भी उनके जन्मदिवस के दिन अपने विचार और उनके आदर्शों के बारे में एक दूसरे से चर्चा करते हैं । इस बार उनके जन्म दिवस के दिन हम आपको एक रोचक कथा बताते हैं कि उनको अंबेडकर उपनाम कैसे मिला ? और बाबा साहब ने बौद्ध धर्म क्यों अपनाया ?
दरअसल बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर का जन्म मध्यप्रदेश के महू गांव में हुआ था । 14 अप्रैल 1891 को पिता के उपनाम में सतपाल लगा था (उपनाम मतलब सरनेम अथवा टाइटल) लेकिन उनके पिता मूल रूप से मराठी थे । गांव का उपनाम अंबाडवे था पिता ने अपना उपनाम बदल कर अंबाडवे कर लिया और यही बाद में अंबेडकर बन गया ।
बाबा साहेब का जन्म हिंदू धर्म के महार जाति में हुआ था और उस वक्त की मान्यता के अनुसार महार जाति को लोग अछूत और निचली जाति के मानते थे । और सिर्फ जाति के कारण प्रतिभाशाली होने के बावजूद बाबासाहेब को हमेशा जातिगत भेदभाव, छुआछूत का सामना करना पड़ा । और इस कुप्रथा ने बाबासाहेब को डॉक्टर भीमराव अंबेडकर बना दिया ।
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| Signature of Baba Saheb |
15 वर्ष की आयु में 9 वर्ष की रमाबाई से उनका विवाह हो गया लेकिन यह शादी उनकी प्रतिभा पर भारी नहीं पड़ी । शादी के बाद मुंबई के एलकिंग्सटन कॉलेज में दाखिला ले लिया । उन्हें ₹25 प्रति माह का स्कॉलरशिप भी मिलने लगा । 1912 में उन्होंने राजनीति विज्ञान एवं अर्थशास्त्र में स्नातक की उपाधि ली और फिर अमेरिका चले गए ।
बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर जी ने न सिर्फ दलित और पिछड़ों के लिए बल्कि महिलाओं के अधिकार के लिए भी संघर्ष किया हैं । हर कोई आज महिला सशक्तिकरण का श्रेय लूटने में लगा हैं परंतु हकीकत में भारत में इस बदलाव के असल नायक डॉ भीमराव अम्बेडकर जी हैं जिन्होंने सभी को एक समान रखा
1916 में उन्हें शोध करने के लिए पीएचडी से सम्मानित किया गया । 1930 में उन्होंने अपना एक और शोध "रुपए की समस्याएं" को पूरा किया और इसके लिए भी उन्हें लंदन यूनिवर्सिटी से डॉक्टर ऑफ साइंस का उपाधि मिली । 1927 में कोलंबिया यूनिवर्सिटी ने उन्हें पीएचडी की उपाधि दी।
जीवन के इस आपाधापी में अंबेडकर आगे तो बढ़ रहे थे लेकिन जिस असमानता का वह सामना कर रहे थे वह उन्हें कचोट रहा था। इसलिए उन्होंने देश भर में घूम-घूम कर दलितों के अधिकार के लिए आवाज उठाए । लोगों को जागरुक करने के के लिए एक समाचार पत्र जिसका नाम "मूकनायक" मतलब की साइलेंट हीरो था जिसे उन्होंनेे शुरू किया ।
सन 1936 में भीमराव अंबेडकर ने स्वतंत्र मजदूर पार्टी की स्थापना की और अगले ही साल केंद्रीय विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी को 15 सीटें मिली । बाद में इसका नाम बदलकर ऑल इंडिया शेड्यूल कास्ट पार्टी (All India Schedule cast) कर दिया गया । सुरक्षा सलाहकार समिति और वायसराय के कार्यकारिणी परिषद के श्रम मंत्री के रूप में कार्यरत रहे । देश के पहले कानून मंत्री बने और संविधाान के गठन केे अध्यक्ष रहे ।
बाबासाहेब आंबेडकर की खास बात यह थी कि यह कानून से ज्यादा समाज को मानते थे । उनका कहना था जब तक आप सामाजिक रूप से स्वतंत्र नहीं हो जाते जब तक समाज खुद आपको इज्जत नहींं देता तब तक कानून कुछ नहींं कर सकता । वे कहते थे कि एक सफल क्रांति केवल असंतोष का होना ही काफी नहीं है बल्कि इसके लिए न्याय, राजनीति और सामाजिक अधिकारों में गहरी आस्था का होना भी बहुत ही आवश्यक है ।
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| Courtesy:religiousworld.in |
ऐसे ही एक और किस्सा है जो बाबा साहब भीमराव अंबेडकर ने बौद्ध धर्म अपना लिया था । दरअसल अंबेडकर बचपन से ही संस्कारी और धार्मिक माहौल में रहे थे । उनका कहना था कि मैं ऐसे धर्म में विश्वास रखता हूं जो स्वतंत्रता, समानता और भाईचारा सिखाएं । साथ ही 1950 में उनकी एक बौद्धिक सम्मेलन में भाग लेने के लिए श्री लंका गए जहां उन्हें बौद्ध धर्म से लगाव सा हो गया।
भारत में आकर उन्होंने इस पर किताब भी लिखा और बौद्ध धर्म ग्रहण कर लिया । 1955 में उन्होंने भारतीय बौद्ध महासभा की स्थापना की । 14 अक्टूबर 1956 को उन्होंने एक सभा में 5 लाख लोगों के साथ बौद्ध धर्म अपना लिया ।
फिर बच्चे के पिता नगर सेठ के पास गए, नगर सेठ ने ₹2 देने का वादा किया तो डॉक्टर इस बार इस शर्त पर मान गया कि अगर बच्चा दलित बस्ती से बाहर आता है तो उसका इलाज करेगा इस शर्त के अनुसार बच्चे के माता-पिता रात को 8:00 बजे अपने बच्चे को लेकर दलित बस्ती से बाहर आए तब जाकर डॉक्टर ने बच्चे का इलाज किया और कुछ दवाएं भिजवाई ।
लेकिन बाद में दोबारा आने से मना कर दिया और इस तरह बच्चे की जान चली गई इस घटना से बाबा साहब भीमराव अंबेडकर बहुत ही दुखी हुए और अपना पूरा जीवन समानता के अधिकार के लिए संघर्ष करते हुए बीता दिए ।
*प्रश्न 1-* डॉ अम्बेडकर का जन्म कब हुआ था?
*उत्तर-* 14 अप्रैल 1891
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*प्रश्न 2-* डॉ अम्बेडकर का जन्म कहां हुआ था ?
*उत्तर-* मध्य प्रदेश इंदौर के महू छावनी में हुआ था।
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*प्रश्न 3-* डॉ अम्बेडकर के पिता का नाम क्या था?
*उत्तर-* रामजी मोलाजी सकपाल था।
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*प्रश्न 4-* डॉ अम्बेडकर की माता का नाम क्या था?
*उत्तर-* भीमा बाई ।
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*प्रश्न 5-* डॉ अम्बेडकर के पिता का क्या करते थे?
*उत्तर-* सेना मैं सूबेदार थे ।
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*प्रश्न 6-* डॉ अम्बेडकर की माता का देहांत कब हुआ था?
*उत्तर-* 1896
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*प्रश्न 7-* डॉ अम्बेडकर की माता के देहांत के वक्त उन कि आयु क्या थी ?
*उत्तर-* 5वर्ष।
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*प्रश्न 8-* डॉ अम्बेडकर किस जाती से थे?
*उत्तर-* महार जाती।
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*प्रश्न 9-* महार जाती को कैसा माना जाता था?
*उत्तर-* अछूत (निम्न वर्ग )।
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*प्रश्न10-* डॉ अम्बेडकर को स्कूल मैं कहां बिठाया जाता था?
*उत्तर-* क्लास के बहार।
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*प्रश्न 11-* डॉ अम्बेडकर को स्कूल मैं पानी कैसे पिलाया जाता था?
*उत्तर-* ऊँची जाति का व्यक्ति ऊँचाई से पानी उनके हाथों परडालता था!
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*प्रश्न12-* बाबा साहब का विवाह कब और किस से हुआ?
*उत्तर-* 1906 में रमाबाई से।
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*प्रश्न 13-* बाबा साहब ने मैट्रिक परीक्षा कब पास की?
*उत्तर-* 1907 में।
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*प्रश्न 14-* डॉ अम्बेडकर के बंबई विश्वविद्यालय में प्रवेश लेने से क्या हुवा?
*उत्तर-* भारत में कॉलेज में प्रवेश लेने वाले पहले अस्पृश्य बन गये।
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*प्रश्न 15-* गायकवाड़ के महाराज ने डॉ अंबेडकर को पढ़ने कहां भेजा?
*उत्तर-* कोलंबिया विश्व विद्यालय न्यूयॉर्क अमेरिका भेजा।
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*प्रश्न 16-* बैरिस्टर के अध्ययन के लिए बाबा साहब कहां और कब गए?
*उत्तर-* 11 नवंबर 1917 लंदन में।
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*प्रश्न 17-* बड़ौदा के महाराजा ने डॉ आंबेडकर को अपने यहां किस पद पर रखा?
*उत्तर-* सैन्य सचिव पद पर।
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*प्रश्न 18-* बाबा साहब ने सैन्य सचिव पद को क्यों छोड़ा?
*उत्तर-* छुआ छात के कारण।
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*प्रश्न 19-* बड़ौदा रियासत में बाबा साहब कहां ठहरे थे?
*उत्तर-* पारसी सराय में।
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*प्रश्न 20-* डॉ अंबेडकर ने क्या संकल्प लिया?
*उत्तर-* जब तक इस अछूत समाज की कठिनाइयों को समाप्त ने कर दूं तब तक चैन से नहीं बैठूंगा।
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*प्रश्न 21-* डॉ अंबेडकर ने कौनसी पत्रिका निकाली?
*उत्तर-* मूक नायक ।
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*प्रश्न 22-* बाबासाहेब वकील कब बने?
*उत्तर-* 1923 में ।
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*प्रश्न 23-* डॉ अंबेडकर ने वकालत कहां शुरु की?
*उत्तर-* मुंबई के हाई कोर्ट से ।
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*प्रश्न 24-* अंबेडकर ने अपने अनुयायियों को क्या संदेश दिया?
*उत्तर-* शिक्षित बनो संघर्ष करो संगठित रहो ।
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*प्रश्न 25-* बाबा साहब ने बहिष्कृत भारत का
प्रकाशन कब आरंभकिया?
*उत्तर-* 3 अप्रैल 1927
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*प्रश्न 26-* बाबासाहेब लॉ कॉलेज के प्रोफ़ेसर कब बने?
*उत्तर-* 1928 में।
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*प्रश्न 27-* बाबासाहेब मुंबई में साइमन कमीशन के सदस्य कब बने?
*उत्तर-* 1928 में।
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*प्रश्न 28-* बाबा साहेब द्वारा विधानसभा में माहर वेतन बिल पेश कब हुआ?
*उत्तर-* 14 मार्च 1929
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*प्रश्न 29-* काला राम मंदिर मैं अछुतो के प्रवेश के लिए आंदोलन कब किया?
*उत्तर-* 03 मार्च 1930
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*प्रश्न 30-* पूना पैक्ट किस किस के बीच हुआ?
*उत्तर-* डॉ आंबेडकर और महात्मा गांधी।
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*प्रश्न 31-* महात्मा गांधी के जीवन की भीख मांगने बाबा साहब के पास कौनआया?
*उत्तर-* कस्तूरबा गांधी
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*प्रश्न 32-* डॉ अम्बेडकर को गोल मेज कॉन्फ्रंस का निमंत्रण कब मिला?
*उत्तर-* 6 अगस्त 1930
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*प्रश्न 33-* डॉ अम्बेडकर ने पूना समझौता कब किया?
*उत्तर-* 1932 ।
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*प्रश्न 34-* अम्बेडकर को सरकारी लॉ कॉलेज का प्रधानचार्य नियुक्त कियागया?
*उत्तर-* 13 अक्टूबर 1935 को।
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*प्रश्न 35-* मुझे पढे लिखे लोगोँ ने धोखा दिया ये शब्द बाबा साहेब ने कहां कहे थे?
*उत्तर-* आगरा मे 18 मार्च 1956 ।
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*प्रश्न 36-* बाबा साहेब के पि. ए. कोन थे?
*उत्तर-* नानकचंद रत्तु।
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*प्रश्न 37-* बाबा साहेब ने अपने अनुयाइयों से क्या कहा था?
*उत्तर-* - इस करवा को मै बड़ी मुस्किल से यहाँ तक लाया हु !
इसे आगे नहीं ले जा सकते तो पीछे मत जाने देना।
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*प्रश्न 38-* देश के पहले कानून मंत्री कौन थे?
*उत्तर-* डॉ अम्बेडकर।
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*प्रश्न 39-* स्वतंत्र भारत के नए संविधान की रचना किस ने की?
*उत्तर-* डॉ अम्बेडकर।
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*प्रश्न 40-* डॉ अंबेडकर ने भारतीय संविधान कितने समय में लिखा?
*उत्तर- 2* साल 11 महीने 18 दिन।
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*प्रश्न 41-* डा बी.आर. अम्बेडकर ने बौद्ध धर्मं कब और कहा अपनाया?
*उत्तर -* 14 अक्टूबर 1956, दीक्षा भूमि, नागपुर।
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*प्रश्न 42-* डा बी.आर. अम्बेडकर ने बौद्ध धर्मं कितने लोगों के साथ अपनाया?
*उत्तर-* लगभग 10 लाख।
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*प्रश्न 43-* राजा बनने के लिए रानी के पेट की जरूरत नहीं,
तुम्हारे वोट की जरूरत है ये शब्द किस के है?
*उत्तर-* डा बी.आर. अम्बेडकर।
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*प्रश्न 44-* डा बी.आर. अम्बेडकर के दुवारा लिखित महान पुस्तक का क्या नाम है?
*उत्तर-* दी बुद्ध एंड हिज धम्मा।
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*प्रश्न 45* - बाबा साहेब को किस पुरस्कार से सम्मानित किया गया?
*उत्तर-* भारत रत्न।
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रोजाना की जिंदगी में हमारी मुलाकात बहुत सारी चीजों से होती है । हम उन चीजों को इस्तेमाल में लाते हैं और आगे बढ़ जाते हैं । उन चीजों के नामों का मतलब जानने की कोशिश ही नहीं करते है ।
आज एक ऐसी चीज के नाम के ओरिजिन के बारे में बताने जा रहे हैं जो चीज आपके और मेरी जिंदगी का एक अटूट हिस्सा बन चुका है । मैं बात कर रहा हूं एक डाटा ट्रांसफरिंग सॉफ्टवेयर (Data Transferring Software) की । जिसे हम और आप ब्लूटूथ (Bluetooth) के नाम से जानते हैं ।
क्या आपने कभी सोचा है कि यह लफ्ज़ ब्लूटूथ (Bluetooth) जिसका वास्तविक मतलब निकालना बहुत कठिन हो जाता है या उसके नाम का मतलब नीला दांत हो जाता है । क्या आपने कभी सोचा है कि एक डाटा ट्रांसफरिंग सॉफ्टवेयर (Data Transferring Software) को यह नीला दांत जैसा नाम आखिर क्यों दिया गया है । तो इसलिए आज हम आपको यही बताने वाले हैं कि आखिर ब्लूटूथ का नाम ब्लूटूथ कैसे और कब पड़ा ।
सन 1988 में मोबाइल कंपनी इरेक्शन, नोकिया, तोशीबा और इंटेल (Errection, Nokia, Toshiba, Intel) के कॉलेशन में एक ग्रुप बनाया गया । ग्रुप का मकसद वायरलेस टेक्नोलॉजी डिवेलप (Wireless Technology) करना था ।
इस ग्रुप में करीब 400 सदस्य थे और इस ग्रुप के लीडर Jim Cardach दो साल के कठिन परिश्रम के बाद Jim Cardach और उनकी टीम कामयाब हुई इस प्रकार इरेक्शन ने E-36 के नाम से पहला ब्लूटूथ वाला मोबाइल मार्केट में लांच कर दिया । सन 2000 में यह तो था ब्लूटूथ का इतिहास ।
अब जानते हैं ब्लूटूथ के बारे में कि ब्लूटूथ का नाम आखिर ब्लूटूथ क्यों पड़ा ।
ब्लूटूथ (Bluetooth) नाम दरअसल नार्वे और डेनमार्क के एक राजा हेरोल्ड ब्लूटूथ (Herold Bluetooth) के नाम पर पड़ा है। यह राजा सन 957 से 986 तक नार्वे और डेनमार्क का राजा था । नार्वे में सबसे पहला ईसाई बनने वाला राजा का नाम भी हेरोल्ड ब्लूटूथ (Herold Bluetooth) ही था ।
हेरोल्ड ब्लूटूथ एक महान योद्धा और प्रभावशाली इंसान था, इसकी शख्सियत की वजह से Jim Cardach इससे बहुत ज्यादा प्रभावित थे । अभी आप सोच रहे होंगे कि आखिर सॉफ्टवेयर का नाम ब्लूटूथ का इस राजा से क्या लेना देना । तो इसके पीछे की इंटरेस्टिंग कहानी है ।
Jim Cardach एक इंटरव्यू में बताते हैं कि जिस दौरान हम डाटा एक्सचेंजिंग या ट्रांसफरिंग सॉफ्टवेयर पर काम कर रहे थे उस दौरान हमें बहुत सारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था । साथ ही Jim Cardach उस दौरान हेराल्ड ब्लूटूथ (Herold Bluetooth) पर आधारित एक किताब पढ़ रहे थे ।
Jim Cardach कहते हैं हेराल्ड ब्लूटूथ के बारे में पढ़कर मैं उनसे ज्यादा प्रभावित था और इसकी वजह से जब हमारा वह सॉफ्टवेयर सक्सेसफुली डिवेलप हो गया तो हमने अपने इस इन्वेंशन का नाम उसी महान राजा के नाम हेराल्ड ब्लूटूथ के नाम पर रख दिया ।
ब्लूटूथ का लोगो भी हैरान ब्लूटूथ (Herold Bluetooth) के नाम पर ही है दरअसल ब्लूटूथ का चिन्ह रूण से बना है । ब्लूटूथ का चिन्ह रूण (रूण एक लेटर या कैरेक्टर होता है) जो विभिन्न प्राचीन जर्मनी के लोगोंं के विशेष रूप से स्कैंडिनेवियाई और एंग्लो सैंक्शन है ।
ब्लूटूथ के चिन्ह में हेराल्ड के आरंभिक और अंतिम अक्षर H और B शामिल है । जो हेराल्ड ब्लूटूथ के नाम से लिया गया है क्यों कि हेराल्ड ब्लूटूथ में विभिन्न देशो को अपने शासन में एकजुट करने की क्षमता थी ।
उसी प्रकार ब्लूटूथ भी कई सारे मोबाइल कनेक्शन को एक साथ जोड़ने की क्षमता होती है जोकि हेराल्ड ब्लूटूथ के विचार से मेल खाता है । इसलिए इनकी लोगो में भी हेराल्ड ब्लूटूथ की विचारधारा को प्रदर्शित किया गया है ।
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| Curriculum Vitae |
बायोडाटा (Bio-data) में केवल मूलभूत जानकारियां भी दी जाती है । यह बहुत छोटा होता है । जबकि रिज्यूम और सीवी में मूलभूत जानकारियों को विस्तार से और अधिक स्पष्टता के साथ प्रस्तुत किया जाता है । सीवी (Curriculum Vitae) में अनुभव व प्रोफेशनल जानकारियां अस्पष्ट और जॉब ओरिएंटेड (Job Oriented) ढंग से दी जाती हैं ।
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| Bio-data: Pinterest |
बायोडाटा (Bio-data) एक पेज का होता है जबकि रिज्यूम दो पेज तक बनाया जा सकता है और सीवी (Curriculum Vitae) को विस्तृत जानकारी के लिए कितना भी बढ़ाया जा सकता है । हालांकि सीवी को भी 3 पेज से ज्यादा का नहीं बनाना चाहिए । भले ही आप काफी अधिक अनुभवी क्यों ना हो ।
बायोडाटा में एक कामचलाऊं रिज्यूम (Resume) के फॉर्मेट का उपयोग किया जाता है जबकि सीवी में रिज्यूम और क्रोनोलॉजिकल रिज्यूम फॉरमैट को अपनाते हैं ।
नियोक्ता एक या दो पेज तक के रिज्यूम (Resume) को वरीयता देते हैं । फ्रेशर्स के लिए एक पेज का व अनुभवी प्रोफेशनल्स के लिए रिज्यूम दो पेज तक का हो सकता है ।
एक परफेक्ट रिज्यूम में निजी जानकारी से शुरुआत करते हुए आप रुचिकर क्षेत्र शिक्षा प्रोफेशनल स्किल और भाषाओं का ज्ञान आदि बता सकते हैं ।
"बायोडाटा (Bio-data) से अलग रिज्यूम और सीवी का उपयोग जब वह एकेडमिक आवेदन के लिए होता है"
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